कांग्रेस नेता रोशन बेग का इल्जाम, “अब कांग्रेस वो पार्टी नहीं रही जो इंदिरा गांधी के जमाने में थी”

एग्जिट पोल को बाद और नतीजों से पहले ही कांग्रेस में ठीकरा फोड़ने का खेल शुरू हो गया है। इसके साथ राज्य में जेडीएस और कांग्रेस गठबंधन सरकार के भविष्य को लेकर भी अटकलों का बाजार तेज है।

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के एग्जिट पोल्स के साइड इफेक्ट कर्नाटक में दिखने लगे हैं। वोटों की गिनती से पहले ही कर्नाटक कांग्रेस में बगावत हो गई है। बगावत का झंडा बुलंद किया है पार्टी के सीनियर नेता रोशन बेग ने। बेग का आरोप है कि पार्टी मुसलमान और ईसाइयों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल तो करती है लेकिन चुनाव में टिकट नहीं देती। इसके लिए बेग ने सिद्धारमैया और प्रभारी केसी वेणुगोपाल को जिम्मेदार ठहराया।

रोशन बेग ने इल्जाम लगाया कि अब कांग्रेस वो पार्टी नहीं रही जो इंदिरा गांधी के जमाने में थी। अब कांग्रेस में न नेताओं की कद्र है, न कार्यकर्ताओं की, सिर्फ पैसा चलता है लेकिन उन्हें बगावत करना महंगा पड़ गया है। पार्टी ने रोशन बेग को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बेग ने प्रदेश नेतृत्व पर मुसलमानों और ईसाइयों को टिकट देने में नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था

रोशन बेग कर्नाटक में कांग्रेस के बड़े मुस्लिम चेहरा हैं लिहाजा उनके बयान पर बवाल मच गया। पार्टी ने फौरन कारण बताओ नोटिस थमाते कार्रवाई की बात कही है। दरअसल, एग्जिट पोल्स में कर्नाटक को लेकर कांग्रेस के लिए अच्छी ख़बर नहीं है।  सभी पोल में कर्नाटक में कांग्रेस की बड़ी हार का अनुमान जताया गया है।

एग्जिट पोल को बाद और नतीजों से पहले ही कांग्रेस में ठीकरा फोड़ने का खेल शुरू हो गया है। इसके साथ राज्य में जेडीएस और कांग्रेस गठबंधन सरकार के भविष्य को लेकर भी अटकलों का बाजार तेज है। दोनों खेमा एक दूसरे के विधायकों के संपर्क में होने का पहले से दावा करते रहे हैं। 225 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी के 104 विधायक हैं। यानी बहुमत के लिए सिर्फ 8 विधायकों की जरूरत है। रोशन बेग जैसे नेताओं की बगावत गठबंधन के लिए चिंता बढ़ाने वाली है।

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