इंदौर के खतरनाक केमिकल वाले पानी ने शिप्रा को भी प्रदूषित किया, सैंपल जांच के लिए लैब भेजा

इंदौर के नाले में मिलाया खतरनाक केमिकल अब शिप्रा को भी प्रदूषित कर रहा है। कान्ह नदी के रास्ते यह केमिकल वाला पानी गऊघाट स्टापडेम तक पहुंच गया है। इससे शिप्रा का पानी भी पीने लायक नहीं बचा है। पीएचई ने कान्ह के पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा है। इससे पता चलेगा इसमें कौन सा केमिकल मिला है और यह पानी पीने लायक बन सकता है या नहीं। इधर जल संसाधन विभाग के ईई वीरेंद्र भंडारी का कहना है इंदौर और सांवेर में कान्ह के पानी की जांच प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा की जा चुकी है, जिसमें पानी में किसी खतरनाक केमिकल की पुष्टि नहीं हुई है।

शिप्रा का पीना तो दूर नहा भी नहीं सकते
पीएचई ने कान्ह के पानी के सैंपल राघोपिपलिया स्टापडेम से लिए। उपयंत्री संतोष दायमा ने सैंपलिंग की। जांच के बाद शिप्रा के पानी की क्वालिटी पता चलेगी। जलप्रदाय प्रभारी अतुल तिवारी के अनुसार अभी शिप्रा का पानी जलप्रदाय में उपयोग नहीं किया जा रहा है। इसे निकालने के लिए गेट खोले हैं। ये पानी रामघाट पहुंच रहा है। इससे रामघाट पर भी श्रद्धालुओं को स्नान के लिए साफ पानी नहीं मिल रहा।

कान्ह के गंदे पानी की रोकथाम के लिए उपाय नहीं किए तो नर्मदा से मिलने वाले साफ पानी का उपयोग भी पीने में नहीं हो सकेगा। ग्रामीणों का कहना है त्रिवेणी के कान्ह नदी पर बने पुल को स्टापडेम बनाकर कान्ह के पानी को शिप्रा में मिलने से रोका जा सकता है। रविवार को इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में अज्ञात टैंकर ने कान्ह नदी में केमिकल वाला पानी डाल दिया था, जिससे लोगों को जलन और घबराहट की शिकायत हो गई थी।

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