Poetry Update: जीवन की वस्तविक्ता से दूर भावनाओं का सफर

जीवन

जीवन की वस्तविक्ता से दूर भावनाओं का सफर।।
लिख रहे थे हम आंख मूंदे ,
पता ही न चला कब रात हो गई।
आंख खुली तो अँधेरा था,
सोचा सायद अभी भी आंख बंद होगी।
खूब कोशिश की आँख खोलने की,
ज़ोर लगाया,
आँखे मसली,
पानी मारा पर आंख न खुली।
अँधेरा ज्यों का त्यों बना रहा।
व्याकुलता बढ़ने लगी.
न जाने कैसे कैसे ख्याल मन के पटल में सरसराने लगे,
तभी अचानक किसी ने बल्ब का स्विच ऑन कर दिया
सारा कमरा जगमगा उठा।
दिल और दिमाग अलग थलग हो गए
अहसास हुआ ………
भावनाओ से ग्रसित हम वास्तविक जीवन से काफी दूर निकल गए थे।

सुनील शर्मा  9766938085

WhatsApp chat