ऐसा देश है मेरा……अतिथिदेवो भव दिव्य कुम्भ 2019

 

अद्भुत अकल्पनीय अविश्वसनीय ये शब्द वो है जो सहसा आज सुबह की पहली किरण के साथ मेरे मस्तिष्क में प्रस्फुटित हो गये । जैसे मैं अपनी दैनिक दिनचर्या में सुबह दौड़ने के लिए सड़क पर निकला तो मेरे सामने एक दृश्य था जो समस्त देशवासियों को उनके भारतीय संस्कृति से जुड़ा होने का गर्व करता है, छोटे छोटे बच्चे कतार बद्ध खड़े थे उनके हांथों में अंगोला,अर्जेन्टीना,ऑस्ट्रिया, ग्रीक कोरिया, पुर्तगाल,वियतनाम, न्यूजीलैंड, नाइजीरिया आदि इतने देशों के झंडे उनके हांथों में थे कि मेरे लिए यहाँ उनका वर्णन कर पाना संभव नही है सहसा मुझे लगा कहीं मैं संयुक्त राष्ट्र संघ स्ट्रीट पर तो नही आगया मुझे अपनी आँखों पर विस्वास नही हो रहा था मैंने ट्रैफिक ड्यूटी में लगे जवान से पूछ ही लिया “चाचा ये कौन सी रोड है”…..प्रतिध्वनि…… कानपुर रोड ओर ये विवेकनंद चौराहा है ।

मेरी जिज्ञासा थमने का नाम नही ले रही थी मैं आगे बढ़ गया और तभी मेरी नजर पास में लगी होल्डिंग पर पड़ी जिसमे प्रधानमंत्री जी मुस्कुरा रहे थे लिखा था “कुम्भ में पधारे सभी विदेशी राजनयिकों का भारत ह्रदय से स्वागत एवं अभिनंदन करता है” मित्रों ये कोई संयुक्त राष्ट्रसंघ स्ट्रीट नही प्रयागराज की कानपुर रोड (हाईकोर्ट रोड) है ये बच्चे यहीं के स्कूली बच्चे है जो हांथों में विदेशी झंडे लिए विभिन्न वस्त्र में व विभन्न मुद्रावों में “वन्दे मातरम” और “सारे जहाँ से अच्छा” गुनगुना रहे थे । तभी अचानक जॉर्जिया और इजिप्ट के राजदूतों की गाड़ियां मेरे सामने से गुजरीं पूरा पुलिस महकमा चौकन्ना हो गया और तभी विनम्र मुद्रा में उन राजनयिकों ने अपने हाँथ बाहर निकाल कर समस्त भारत का अभिवादन स्वीकार किया रक्षा अध्ययन का विद्यार्थी होने के नाते ये देख कर मेरा मन प्रफुल्लित हो गया । इस आयोजन में उत्तर प्रदेश पुलिस ट्रैफिक पुलिस और शिक्षकों तथा अभिभावों का विशेष योगदान दिखाई दिया । हमे अपनी संस्कृति पर गर्व है और होना भी चाहिए क्यों कि इसके बिना भारत का विश्वगुरु बनाने का सपना पूरा नही हो सकता ।

लेखक- कोमल नारायण त्रिपाठी, रायबरेली

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