गजल – देश क्या है ?

देश क्या हे

मिट्टी , हवा , पानी का यह देश है।
सुख , अमन और शांति का संदेश है।।

हैं सभी तहजीब फलती – फूलती।
पुष्प से उनके सजा यह केश है।।

है प्रतिष्ठित मान सब का – सब मतों का।
हर घरों से जन्मता अवधेश है।।

राष्ट्र हित में नित करें कुर्बान गर्दन।
देश – भक्ती का यहाँ परिवेश है।।

मिट गए हम को मिटाने वाले सब।
हस्ती हमारी आज भी अधिशेष है।।

राष्ट्र पहनो, राष्ट्र गाओ, राष्ट्र को ओढ़ो-बिछाओ।
राष्ट्र पर चिंतन करो ऐसा विधिक आदेश है।।

  • राजेश तिवारी, रीवा, म०प्र०

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