Poetry Update: लड़किया अब भी बेचारिया

कोई यू न बधे उनकी किलकारियां
हर विधा में निपुण आज की नारियाँ

हर पिता को गुमा नाज़ परिवार को
उनकी बेटियां पे जब बजती है तारिया

बात ऊँचे अचल या गगन की करू
या की घर की निभाती जिम्मेवारियां

हर दिशा में कदम से कदम मिल रहे है
हो निजी सर्विशे या की सरकारिया

बाप की बात बेटे की कुछ झिटकिया
घर बचाती है सहजाति लाचारिया

सांझ की हर थकन तब तर्रनुम हुई
जब सजाती हुई खाने के थरिया

भूल हो गयी तुम्हारे समझने की ये
रह गयी लड़किया अब भी बेचारिया ||

रचना – राजेश तिवारी, रीवा, म०प्र०

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