बेटी

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दोस्तो,

बहुत दर्द है इन लफ्जो में
आखिर ऐसा क्यो है ??
अगर ऐसा है तो बहुत ही ह्रदय विदारक है !
क्यो आखिर बेटियाँ ही ऐसी परस्थिती का
सामना करने पर मजबूर है
आखिर, ऐसा करके सबको क्या खुशी
मिलती है, किसी ने बहुत सच बात कही है
कि, किसी का दिल दुखाकर, किसी को
तकलीफ देकर, उसका अपमान करके
आप कभी भी खुँश नही रह सकते
असली खुँशी, किसी के चैहरे पर
मुस्कुराहट देना है, ना कि उसके होठो से
हँसी छीन लेना !!
बेटियाँ, आपकी हो या किसी दूसरे की
उनकी भावनाओ की कद्र करे,
अगर आप अपनी बेटी के लिए एक अच्छा परिवार,
एक अच्छा लडका तलाश करते है ताकि वो खुँश रहे, उसी तरह दूसरे पिता ने भी कुछ इस तरह की बाते
सोंचकर अपनी बेटी को आपके घर मे बिहाया है,
अगर आप अपनी बेटी को दुखी नही देखना चाहते
उसी तरह किसी दूसरे की बेटी के साथ
अपनी बेटी जैसा व्यहवार करे !!
आप एक बार उसे वो प्यार,वो सम्मान,
वो लाड तो करके देखिये, मै शर्त के साथ कहता हुँ
कि वो आपने माँ-बात को कभी शर्मिन्दा नही करेगी,
दूसरे की बेटी को एक बार अपनी बेटी बनाकर देखिये,
कसम से अपना सब कुछ न्योछावर ना कर दे तो कहना !!
“हम सबको अपनी सोंच बदलनी होगी
तभी हमारी बेटियो को भी एक अपना घर मिल सकेगा,
जिसको सच मे वो अपना घर कह सकेंगी”
“जिस दिन बहुओ को भी बेटियो की तरह प्यार और
सम्मान मिलना शुरू हो जायेगा, उस दिन किसी भी पिता
को अपनी बेटी विदा करते समय तकलिफ नही होगी”
बेटियो को समर्पित
लेखक- (ठाकुर कैलाश सिंह)

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