सुन्दरता नहीं योग्यता मेरी पहचान…

काव्यगोष्ठी में कवियों ने दिया संदेश
नरसिहपुर  । राखन  राग  के सुमधुर स्वर में सरस्वती वन्दना  हे मात हमारी, जय हो तुम्हारी, तुम बुद्धि की हो दाता हे सरस्वती माता  के साथ नरसिंह साहित्य परिषद की मासिक काव्य गोष्ठी का शुभारंभ विजय नामदेव  बेशम  के  संचालन में वी.आई.पी. स्कूल में हुआ । जिसमें प्रथम क्रम में आये कवि नेतराम झारिया ने नाम असंभव डिक्शनरी से आज अभी हटवा दो  कविता के माध्यम से एक सकारात्मक शुरुआत की तो उसके बाद पधारे आशीष सोनी  आदित्य  ने वर्तमान में गौ की दशा को अपने काव्य  कलयुग घोर आ गया है, क्या दशा हुई करतार की, चौराहे पर मारी फिरती माता इस संसार की  से दर्शाया ।
ऐसे काव्यमय माहौल में पोषराज मेहरा  अकेला  ने अपनी ग़ज़ल घना है कोहरा रस्ता नहीं दिखता कोई, काश इस वक्त मिरे साथ भी चलता कोइ  से महफ़िल को नये आयाम दिये और रामजी ठाकुर ने  दिलों में नये-नये ख्वाब पल रहे होंगे, नींद नहीं आती होगी रातों को घर में जाकर देखो बिस्तर में करवटें बदल रहे होंगे  ने विरह की व्यथा को व्यक्त किया, तो भगवान दास पहलवान ने अपने दोहों व गीतिका  मुखड़ा उकेरो ऐसा शिल्पी बना जाये, ज्ञान प्रधान हो ऐसा तुलसी बना जाये  से अपनी बात सबके समक्ष रखी । सर्द मौसम में गर्मी का अहसास लिए अशोक पटेल ने अपनी ग़ज़ल  कहां-कहां से तिनके लाती, मेरे घर मे गोरैया  से सबको ताली बजाने पर मजबूर कर दिया। जिसमें नमिता सिंह जाट ने भी अपनी स्वर माधुरी से जब गाया  संभलकर पांव रख ऐ ज़िन्दगी, मुझे दर्द होता है  तो गोष्ठी अपनी ऊंचाइयों पर पहुंच गई और ऐसे में सुश्री इंदु सिंह ने सुन्दरता नहीं योग्यता मेरी पहचान काव्यकथा से काव्य गोष्ठी में नया रंग घोला । शहीदों के चारण मदन ठाकुर ने गुरु नानक जयंती पर की पाकिस्तान यात्रा के अनुभव सबके साथ सांझा किये और अंतिम क्रम में प्रशांत शर्मा ने अपनी कविता  अब गुलाबी ठंड और तपती सुनहरी दुपहरी है ओस भी अश्रु बन धरा की पलकों पर ठहरी ह  सुनाई तथा आशीष सोनी के आभार प्रदर्शन के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।संवाददाता आकाश कौरव

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