मौत पर कविता: मौत, अटल सत्य है

अटल सत्य है
अपने वक्त पर अडिग मौत
टल नही सकता
चाहे कितना भी जमा लो,धौंस।

पथ का राही,जीवन की बाजी
लडता है, किसलिए
कालचक्र के समय पर
अंकित है जब नाम।

चलते-चलते थक-हार कर
सिमट जाएँगे सभी,काम।

आगोश में सिमटकर
ना खत्म हो वजूद हमारी
इसलिए ऐ दोस्त
कर लो कुछ भले काम।

झूठ फरेब की दल-दल में
क्यों उलझता जाता
नेकियो से रिश्ता
क्यों छूटता जाता।

बिगडे बोल, बिगडती आशा
जीवन में निराशा ही निराशा।

अटल सत्य है
अपने वक्त पर अडिग मौत
टल नही सकता
चाहे कितना भी जमा लो, धौंस।
“आशुतोष”
पटना बिहार
मो• 9852842667

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