Poetry : बाल दिवस विशेष

एक चाचा की चाह में, बचपन खो गया
भूखे है इस तरह की,संस्कार खो गया
नवीनता तुम्हें मुबारक
शालीनता लौटा दो
बस एक बार मेरा चाचा लौटा दो।

चाचा थे आधुनिक भारत के निर्माता
विज्ञान प्रोद्यौगिकी के प्यारे
समस्त राष्ट्र को चमका गए
विलासिता के उपकरणों से
भारत को संवार गये
अपनी अपनी सोच है
वही कुर्सी वही देश है
फिर क्यू कारखाने बंद पडे?
बेरोजगारो की रोज फौज बढे
शासन प्रशासन मौन खड़े
समाधान की चिंता कौन करे?
बाल दिवस पर भी
बच्चो को काम करना पडे, क्योंकि
एक चाचा की चाह में,बचपन खो गया
भूखे है इस तरह की, संस्कार खो गया।

   “आशुतोष” – पटना बिहार –  
मो•9852842667

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