Poetry : “डूबता जहाज”

चौदह के रंग
उन्नीस के संग
जहाज की जंग
बौखलाहट से तंग
आहिस्ता-आहिस्ता
सौदों के संग
मेल मिलाप और
झमेलों से तंग
सुरक्षा चाक-चौबंद
फिर भी,धीरे-धीरे सुप्रीम के संग
आशायें, जागृत हुईं
झूठ की खैर नहीं
सच से बैर नहीं
अब तो सबको पसंद
पक्ष-विपक्ष न मचाओ हुडदंग
अब पोल खुल जाएगी
सब-कुछ सामने आएगी
थोड़ा-इंतजार थोडा-इंतजार
सब बैठे हैं तैयार
चौदह के रंग,उन्नीस के संग।।
“आशुतोष”

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