Poetry : नारी सम्मान

नारी नारी कयों करते हो
नारी तो है सबसे प्यारी
इनके रूप अनेक है
हर रूप में नेक हैं
इनके बिना दुर्लभ संसार हमारी।

सभ्यता की पहचान
ममता की खान
चेहरे की मुस्कान भी
दुर्लभ को सुलभ बनाती
ऐसी पहचान है नारी
नारी नारी कयों करते हो
नारी तो है सबसे प्यारी।

परिश्रम से कभी न घबराती
उलझनों में साथ निभाती
हर घर की शोभा बढ़ाती
जीवन की हर पाठ पढ़ाती
सेवा की खान है नारी
नारी नारी कयों करते हो
नारी तो है सबसे प्यारी

जीवन चक्र की स्तंभ
अपने पथ पर चलती है
सदा औरो को सुख देकर
खुद दुःख में रहती हैं नारी
नारी नारी कयों करते हो
नारी तो है सबसे प्यारी

शहनशीलता की प्रतिमूर्ति
जाने क्या-क्या जतन करती है
सारे सपने इनके ही
आँखो से होकर गुजरती है
संस्कारों की जन्मदात्री है नारी
नारी नारी कयों करते हो
नारी तो है सबसे प्यारी।
“आशुतोष”
पटना बिहार

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