Poetry Update: संस्कृत ज्ञान

संस्कृत भाषा में – 102 करोड़ 78 लाख 50 हजार शब्द हैं, अंग्रेजी – 2600 मूल+9400 आयातित = 12000, गुजराती – 40000, मराठी – 48000, हिंदी – 70000.

इसका मतलब संस्कृत ग्रन्थ का अनुवाद, किसी भी अन्य भाषा मे सही नहीं किया जा सकता. मन्ने, मैकू {मैक्स मूलर}, जोकर नाइक, और अम्बेडकर इत्यादि को फॉलो करने वाले कितने बुद्धिमान हैं ?

दारा सिकोह {औरंगजेब का सगा बड़ा भाई} के फारसी अनुवाद से उपनिषद यूरोप पहुँचे, जिसके बाद ही यूरोप के फिलोशॉफी में काफी बदलाव आये और यहीं से यूरोप में ”इंडोलॉजी” की नीव पड़ी| उसके बाद….

१.- Anquetil du Perron
२.- Arthur Schopenhauer
३.- Paul Duessen {स्वामी विवेकानंद के अच्छे मित्र थे}
४.- Max Muller

जैसे इंडोलॉजिस्टो ने भारत के दर्शनों के समझना शुरू किया , लेकिन इसाइयत के चश्मे से जो इन्डोलोजिस्ट संस्कृत के मूल अर्थ नहीं जानते थे उन्होंने भी अपनी समझ से हमारे ग्रंथों का अनुवाद कर किताबे छाप दी| इस तरह, भारत के सभी ग्रन्थो का अनुवाद फारसी से यूरोपीय भाषा से अंग्रेजी से सफ़र कर हिंदी में आया|

चूँकि अब देखिए, . संस्कृत में – 102 करोड़ 78 लाख 50 हजार शब्द हैं और अंग्रेजी – 12000 कुल शब्द, इसका मतलब संस्कृत का अनुवाद किसी भी भाषा मे सही नहीं किया जा सकता, इस तरह -भाषाओं, शब्दों और ज्ञानियों के इस सफर में भारतीय ग्रंथो का “मूल अर्थ” सफ़र में ही खो गया और हमारी भूल ये रही कि जो “अर्थ” यूरोप के दार्शनिको ने लगाया उसी “अनर्थ” को हमने “अर्थ” समझ लिया |

भारत में बिक रही मनुस्मृति, हमारी इसी का नतीजा है आज भारत के बाजारों में १२०० से ज्यादा प्रकार की मनुस्मृति धड़ल्ले से बिक रही है,
मने, मनुस्मृति का लेबल लगा कर यदि जहर भी बेच दें, तो आज भारत में उपस्थित मैक्समूलर की संतानें उसे भी खरीद कर छिड़कना और दिखाना शुरू कर देंगी ..कि देखो ये तुम्हारी मनुस्मृति है| जो मनुस्मृति अम्बेडकर ने पढ़कर जलाई थी वो मूलतः इंडोलोजिस्ट मैक्समूलर द्वारा अनुवादित थी न कि – ” वैदिक-धर्म” को परिभाषित करने वाली|

 

– राजेश तिवारी / रीवा / मध्य प्रदेश

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