Religion Update: 27 अक्टूबर को मनाया जाएगा करवा चौथ

रिलिजन डेस्क. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। करवा शब्द का अर्थ मिट्टी का बर्तन होता है। चौथ का शाब्दिक अर्थ चतुर्थी है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सफलता की मनोकामना पूरी होने के लिए कठिन व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित युवतियां सुयोग्य वर की कामना के लिए इस व्रत को धारण करती हैं। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं। यहां तक कि वो जल ग्रहण भी नहीं करतीं। शाम को जब चद्रोदय होता है यानी चांद निकल आता है तो उसे अर्घ्य अर्पित करने के बाद व्रत खोलती हैं। इस साल करवा चौथ 27 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
ऐसे रखें व्रत
करवा चौथ कैसे मनाया जाता है
महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सर्गी खाती हैं। यह खाना आमतौर पर उनकी सास बनाती हैं। इसे खाने के बाद महिलाएं पूरे दिन भूखी-प्यासी रहती हैं। दिन में शिव, पार्वती और कार्तिक की पूजा की जाती है। शाम को देवी की पूजा होती है, जिसमें पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है। चंद्रमा दिखने पर महिलाएं छलनी से पति और चंद्रमा की छवि देखती हैं। पति इसके बाद पत्नी को पानी पिलाकर व्रत तुड़वाता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
इस बार पूजा का मुहूर्त शाम 5.40 से 6.47 तक है। अगर समय के लिहाज से देखें तो इसकी कुल अवधि 1 घंटे 7 मिनट है।
कब खोलें व्रत
अब बात चंद्रोदय यानी चांद के दिखने की। क्योंकि चांद को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। इस बार चंद्रोदय शाम 7.55 पर होगा।
कथा
एक समय की बात है, करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी किनारे बसे गांव में रहती थीं। एक दिन इनके पति नदी में स्नान करने गए। स्नान करते समय नदी में एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया गहरे पानी में ले जाने लगा। मृत्यु को करीब देखकर करवा माता के पति ने करवा को नाम लेकर पुकारना शुरू किया।

पति की आवाज सुनकर करवा माता नदी तट पर पहुंची और पति को मृत्यु के मुख में देखकर क्रोधित हो गईं। करवा माता ने एक कच्चे धागे से मगरमच्छ को बांध दिया और कहा कि अगर मेरा पतिव्रत धर्म सच्चा है तो मगरमच्छ मेरे पति को लेकर गहरे जल में नहीं ले जा सके।

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