Poetry : विचलित मन – दम तोड रही मानवता

दम तोड़ रही मानवता समाज कितनी विचलित हो रही। सामाजिक कुप्रथाओं का चलन कितनी भयावह और विकृत हो रही। कहीं

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Literature : कविताओं के जरिए बेहतर ढंग से व्यक्त हो सकता है सुख-दुख

साहित्य अकादमी संस्कृति परिषद् मप्र शासन संस्कृति विभाग की ओर से मंगलवार को स्वराज भवन में निरंतर रचनापाठ का आयोजन

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