परिन्दे और इंसान के बच्चे में यही तो फर्क है

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90 total views, no views today दिल को छू लेने वाली कुछ पंक्तियां तन्हा बैठा था एक दिन मैं अपने मकान

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Poetry : विचलित मन – दम तोड रही मानवता

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186 total views, no views today दम तोड़ रही मानवता समाज कितनी विचलित हो रही। सामाजिक कुप्रथाओं का चलन कितनी भयावह

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Poetry Update: बिन चैटिंग कैसे जिएं

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437 total views, no views today जबसे बदला है तुमने रुख वाट्सएप्प, ट्ववटर और फेसबुक से। लगता नही कही मन मेरा,

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