Poetry Update: आज पर्वों के मुख यूँ बदल क्यों गए?

आज पर्वों के मुख यूँ बदल क्यों गए? एक ऊर्जा  असीमित  किरण  आस की त्याग   एकाकीपन   मन   सलोने   भए हाय

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Poetry Update: बिन चैटिंग कैसे जिएं

जबसे बदला है तुमने रुख वाट्सएप्प, ट्ववटर और फेसबुक से। लगता नही कही मन मेरा, विरक्ति सी हो गई है

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