फेसबुक ने यूजर्स को ‘फेसबुक रिसर्च’ ऐप इंस्टॉल करने के लिए पैसे दिए, ताकि उनका निजी डेटा हासिल कर सके

  • टेकक्रंच की रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक ने यूजर्स को उनके स्मार्टफोन में डेटा हासिल करने वाली ऐप्स को इंस्टॉल करने के लिए चुपचाप हर महीने भुगतान किया
  • फेसबुक ने अपनी \’फेसबुक रिसर्च\’ ऐप को एंड्रॉयड और आईओएस डिवाइस में इंस्टॉल करने के लिए 2016 के बाद से हर महीने यूजर्स को 20 डॉलर दिए
  • सीएनबीसी से बातचीत में फेसबुक के प्रवक्ता ने भी इस बात को माना कि फेसबुक लोगों का डेटा लेने के लिए कई तरह के प्रोग्राम चला रही है

फेसबुक ने यूजर्स को ऐसी ऐप इंस्टॉल करने के लिए भुगतान किया, जिसके जरिए कंपनी ने उनका डेटा हासिल किया। टेकक्रंच ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है। टेकक्रंच की रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक ने कथित तौर पर एंड्रॉयड और आईओएस यूजर्स को उनके डिवाइस में ‘फेसबुक रिसर्च’ ऐप इंस्टॉल करने के लिए 2016 से लेकर अब तक हर महीने यूजर्स को 20 डॉलर (करीब 1400 रुपए) के साथ-साथ रेफरल फीस भी दी।

इस रिपोर्ट में ये भी कहा है कि, फेसबुक ने इन सबमें अपनी सीधी भागीदारी दिखाने से बचने के लिए ‘ऐपलॉज’, ‘बीटाबाउंड’ और ‘यूटेस्ट’ जैसे प्रोग्राम चलाए, जिसे ‘प्रोजेक्ट एटलस’ नाम दिया गया।

इस ऐप्स से यूजर का निजी डेटा हासिल किया
टेकक्रंच ने अपनी रिपोर्ट में एक सिक्योरिटी एक्सपर्ट के हवाले से लिखा है कि, फेसबुक रिसर्च ऐप की मदद से फेसबुक ने यूजर्स का निजी डेटा हासिल किया। जिसमें सोशल मीडिया ऐप्स के निजी मैसेज, फोटो, वीडियो, ईमेल, वेब सर्च और वेब ब्राउजिंग एक्टिविटी जैसी निजी जानकारी शामिल है। इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि, इस ऐप की मदद से फेसबुक ने यूजर के फोन में इंस्टॉल अन्य लोकेशन ट्रैकिंग ऐप्स के जरिए उनकी लोकेशन की जानकारी भी ट्रैक की।

फेसबुक के प्रवक्ता ने माना, डेटा लेने के लिए प्रोग्राम चला रही है कंपनी
वहीं, सीएनबीसी से बातचीत में फेसबुक के एक प्रवक्ता ने इस बात को माना है कि उनकी कंपनी लोगों के डेटा इकट्ठा करने के लिए प्रोग्राम चला रही है। फेसबुक के प्रवक्ता ने सीएनबीसी को बताया, “कई कंपनियों की तरह हम भी लोगों को रिसर्च में भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हैं। इसके जरिए हम ये जानने की कोशिश करते हैं कि हम और क्या बेहतर कर सकते हैं?” उन्होंने बताया कि, “इस रिसर्च के जरिए फेसबुक ये समझने की कोशिश करता है कि लोग अपने मोबाइल का इस्तेमाल कैसे करते हैं?” हालांकि, प्रवक्ता ने ये भी बताया कि इस डेटा को दूसरों के साथ साझा नहीं किया जाता और लोग जब चाहें तब इस रिसर्च से हट सकते हैं।

फेसबुक के इस कदम से प्राइवेसी का उल्लंघन
फेसबुक के इस कदम से यूजर्स की प्राइवेसी का उल्लंघन होने के साथ-साथ एपल की पॉलिसी का उल्लंघन भी हो रहा है क्योंकि कुछ आईफोन यूजर्स भी इस ऐप को अपनी डिवाइस में इस्टॉल कर रहे हैं। एपल ने पिछले साल फेसबुक की ओनावा सिक्योरिटी ऐप को ऐप स्टोर से हटाया था क्योंकि ये एपल की प्राइवेसी पॉलिसी का उल्लंघन कर रही थी। एपल ने इस ऐप को हटाते समय कहा था कि, किसी भी ऐप को यूजर के फोन में इंस्टॉल दूसरी ऐप के बारे में जानकारी नहीं लेनी चाहिए।

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