Musicly से बना TikTok, फिर हुआ बैन, ये असल वजह

जैसे गंगाधर शक्तिमान था वैसे ही Musicly ऐप ही TikTok है. पहले यह Musicly था बाद में इसे TikTok में तब्दील कर दिया गया. भारत में इसके करोड़ो यूजर्स हो गए और काफी तेजी से फैलने लगा. मद्रास हाई कोर्ट ने इसे इसलिए बैन करने के लिए कहा, क्योंकि कोर्ट को लगता है कि ये ऐप पोर्नोग्राफी और यौन हिंसा को बढ़ावा दे रहा है. इसके बाद भारत में अब ये ऐप लगभग बैन कर दिया गया है. लगभग बैन का मतलब ये है कि अब नय यूजर्स इसे डाउनलोड नहीं कर सकते हैं. ऐपल ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर से इस ऐप को हटा लिया गया है.

यह एक चीनी ऐप है और इसकी पेरेंट कंपनी बाइट डांस है. बैन के बाद कंपनी का कहना है कि इससे भारत में फ्री स्पीच का नुकसान होगा. कंपनी ने भारतीय न्यायिक प्रणाली में विश्वास करने की बात भी कही है और कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले समय में यूजर्स इसे फिर से डाउनलोड कर पाएंगे. बाइट डांस चीन की स्टार्टअप है और यह दुनिया के सबसे ज्यादा वैल्यू वाले स्टार्टअप में से एक है. TikTok भारत के ग्रामीण इलाकों में भी काफी पॉपुलर है.

खास बात ये है कि बैन होने के बावजूद जिन यूजर्स के पास ये ऐप है वो इसे यूज कर रहे हैं. इतना ही नहीं एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही ये ऐप स्टोर से डाउनलोड न किया जा सके, लेकिन इसे लोग शेयर इट जैसे ऐप से एक दूसरे के साथ शेयर कर रहे हैं. इतना ही नहीं थर्ड पार्टी एपीके वेबसाइट्स से इसे अब भी एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स पर डाउनलोड किया जा सकता है.

क्यों बैन हुआ टिक टॉक

Tik Tok ब्लॉक होने की कई वजहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक TikTok वीडियो बनाने के क्रम में एक कॉलेज स्टूडेंट की मौत हो गई. क्योंकि बाइक पर कुछ दोस्तों के साथ टिक टॉक वीडियो बनाया जा रहा था और ऐक्सिडेंट हो गया. दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक चेन्नई के 24 साल के एक युवक ने कथित तौर पर टिक टॉक यूजर्स के हैरेसमेंट के बाद आत्महत्या कर ली, क्योंकि उसने महिलाओं के कपड़े पहन कर वीडियो बनाए थे. इसके बाद मद्रास हाई कोर्ट में TikTok बैन करने के लिए प्ली दाखिल की गई. मद्रास हाई कोर्ट ने भारत सरकार से इस ऐप को देश से बैन करने को कहा. गूगल प्ले और ऐपल स्टोर ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए चीनी ऐप TikTok को ब्लॉक कर दिया है.

हालांकि TikTok ने अपने बचाव में 60 लाख वीडियोज हटाने का दावा किया जो इस ऐप के कम्यूनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन कर रहे थे. इसके साथ ही कंपनी ने कॉमेन्ट्स में फिल्टर्स लगाने शुरू किए ताकि अनचाहे कॉमेन्ट्स न आ सकें. बात सुप्रीम कोर्ट तक गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर से बैन हटाने से मना कर दिया. दलील ये दी गई है कि अभी ये परमानेंट नहीं है, क्योंकि मामला हाई कोर्ट में चल रहा है.

 

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